उत्तर प्रदेश: अपनी बेटी की तलाश में दर – दर भटक रहा , एक गरीब पिता

देश के उत्तरी हिस्से, जिसे हिंदी पट्टी भी कहा जाता है, मे अचानक से पिछले कुछ सालों मे ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जिसमें संगठित रूप से मुस्लिम लड़कियों को धोखे से प्यार में फसाने की कोशिश की जाती है,अधिकतर केसों में यह देखा गया है कि लड़का कुछ समय बाद लड़की को छोड़ देता है या तो लड़की को अपना धर्म परिवर्तन करना पड़ता है।

2016_17 में कुछ बड़े हिंदुत्व संगठनों जैसे विश्व हिंदू परिषद (VHP) या हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों ने गर्व की साथ मीडिया में इस बात को स्वीकार किया है, और खुले आम एलान किया है की वो मुस्लिम लड़कियों की शादी हिंदू लड़कों से कराएंगे।
हम सभी ने हाल ही के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल सबीना प्रवीन की वीडियो देखा है, जो इस मुहिम का एक उदहारण है।
इसी तरह की एक घटना श्रावस्ती जिले के इकौना थाना क्षेत्र से आई है, जहां पर मौजा सेमगढ़ा, के दर्जी पुरवा निवासी जाकिर हुसैन की नाबालिग पुत्री साबरुन निशा (उम्र 16 वर्ष) को राधेश्याम चाई पुत्र हरिराम चाई ने 18_04_21को रात में भगा कर ले गया, आरोपी पास के गांव चाई पुरवा का निवासी है।

पुलिस ने FIR दर्ज करने में 3 दिन लगा दिये जोकि 21_04_21 को शाम में दर्ज हो सकी,

FIR COPY

लेकिन उसके बाद से अब तक पुलिस की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं हुई है। जाकिर हुसैन पेशे से मजदूर हैं और मुंबई में ड्राइविंग का काम करते थे, लेकिन जब से कोरोना महामारी के चलते लॉक डाउन लगा है तब से वह बेरोजगार हो गये हैं। इसी कारण घर की आर्थिक स्थिति खराब चल रही है।
घटना को हुये एक महीने से भी अधिक समय हो गया है,लेकिन अभी तक जाकिर हुसैन की बेटी का पुलिस कोई सुराग नहीं लगा पाई है।

जाकिर हुसैन से जब हमारी बात हुई तो उन्हों ने बताया कि पुलिस हर बार यही कह कर वापस भेज देती है कि आपकी बेटी मिल जाएगी इस बीच जाकिर ने जिले के तमाम बड़े पुलिस अधिकारियों से लेकर पुलिस महानिदेशक लखनऊ उत्तर प्रदेश तक को पत्र लिखा, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।

इसके अलावा मुख्यमंत्री और महिला आयोग को भी पत्र लिखा गया लेकिन लड़की के नाबालिग होने के बावजूद मामले को संज्ञान में नहीं लिया गया।
दर्जी पुरवा ही के एक अन्य व्यक्ति पुलिस की निष्क्रियता के पीछे वजह ये बताई की आरोपित को सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का संरक्षण प्राप्त है।
ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या जाकिर हुसैन जैसे लोग जो समाज के अल्पसंख्यक निम्न आर्थिक वर्ग से आते हैं क्या उन्हें न्याय मिल पायेगा,
या वे कब तक पुलिस और कोर्ट का दरवाजा देखते रहेंगे,जब की उनकी हालत ऐसी नही है जो इस कानूनी प्रतिक्रिया में ज्यादा देर तक अपनी बेटी के लिए लड़ पायेंगे, या फिर वो इसे अपना भाग्य समझ कर बैठ जायेंगे?

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