बीस साल बाद फ़र्ज़ी केस में फंसे 126 बेगुनाह मुसलमानो को कोर्ट ने बाइज़्ज़त बरी किया

सूरत में आयोजित हुए एजुकेशन प्रोग्राम में पुरे भारत से आने वाले १२७ मुसलमानो को सिमी का मेंबर बता कर झूठे केस में गिरफ्तार किया गया था आज २०साल के लम्बे समय के बाद सभी निर्दोष मुसलमानो को सूरत कोर्ट ने बाइज़्ज़त बरी किया !
आल इंडिया माइनॉरिटी एजुकेशनल बोर्ड के जरिये सूरत में राजश्री हॉल में आयोजित मुसलमानो के मसलो पर बात करने के लिए एक सम्मलेन बुलाया गया था !


सूरत पुलिस के अठवा पुलिस इंस्पेक्टर पंचोली ने खूफिया जानकारी का हवाला देकर सम्मेलन में शामिल सभी मुसलमानों को ‘सीमी’ (SIMI) के कार्यकर्ता बता कर गिरफ्तार कर लिया गया था , जिस में पूरे भारत से आलिम, डॉक्टर , एन्जीनीयर्स और सोशल एकटिविस्ट शामिल थे. उन पर यह इल्जाम था कि वो लोग कुछ गलत काम के इरादे से जमा हुये थे।

11 महीने जेल में रखने के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने सब को जमानत पर मुक्त कर दिया था।
इस दौरान मीडीया ने आरोपीयों के खिलाफ बहुत जहरीला प्रचार किए थे … बहुत से आरोपीयों की नौकरीयां चली गई थीं, रोजगार खत्म हो गये थे, लोकल पुलिस उन्हें परेशान करती रही…

आज 20 साल बाद सूरत चीफ मैजिस्ट्रेट ए.एन. दवे साहब ने ‘सीमी’ (SIMI) के आरोप में पकडे गये सभी आरोपीयों को बाइज्जत बरी कर दिया

…20 साल तक कोर्ट के चक्कर खाने के बाद आज इन्साफ मिला.
लेकिन सवाल यह है कि क्या यही इंसाफ है की एक बेगुनाह इंसान 20 सालों से अपनी बेगुनाही साबित कर रहा था, आज जब वह बेगुनाह साबित हो गया है तो उसके 20 साल की जिंदगी उसकी जद्दोजहद और उसके परिवार को हुई परेशानियों को कैसे इंसाफ मिलेगा।

इस मौके पर बेगुनाहों के लिये दुआ करनेवाले आम मुसलमान, हौसला बढाने_वाले हमारे दीनी व मिल्ली जिम्मेदार और दुआ आजमाईश के दौर में बेगुनाहों के घरवालों का ताअव्वुन देनेवालों के लिये दुआ करते है!

अल्लाह उन्हें आखिरत में बेहतरीन बदला अता करें..

रिहा होने वाले आरोपीयों के वकील एडवोकेट एम एम. शेख साहब ने बताया कि – “किसी भी आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधित संस्था ‘सीमी के होने का कोई सबूत न मिलने की वजह से कोर्ट ने सभी को बाइज्जत बरी कर दिया है , कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि किसी ने भी कोई

गैरकानूनी काम नही किया था.” आरोपीयों में एक व्हील चेयर में आयें 86 साल के सहारनपुर के मौलाना अताऊर रहमान वजदी साहब ने कहा कि-

“पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन के जरिये अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर के अगर इसी तरह किसी को 20 साल परेशान किया जायें, तो यह मुल्क और समाज के लिये बड़ी गलत मिसाल साबित होगी.

127 लोगों को और उन के परिवारवालों को 20 साल जो भुगतना पडा उस का मुआवजा की भरपाई कौन करेगा??”

इस नफरत के माहौल में एक जज दवे साहब ने यकीनन सब को इन्साफ में यकीन दिलाया है लेकिन 20 साल के इस झूठे इल्जाम में बहुत से लोगों की सरकारी नौकरीयां गई, कारोबार खत्म हुये, शादीयां तक रुक गई, लोगों के इल्जाम और तंज सहते रहे ….लेकिन अल्लाह का शुक्र है कि वो हम पर अपनी
ताकत से ज्यादा बोझ नही डालता.

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