पूर्व वरिष्ठ बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा त्रिमणूल कांग्रेस में शामिल

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त्रिमणूल कांग्रेस में शामिल होने से पहले यशवंत सिन्हा का बयान

इसके पहले कि मैं आपसे दो शब्द करूं। मैं एक सुखद समाचार अपनों को देना चाहता हूं। ये जो जवानी है उसके अलावा और वो ये है कि आज डेरेक ओ का जन्मदिन है और उनका 60वां जन्मदिन है जो बहुत ही विशेष है। इसलिए आप सब लोगों की ओर से हम उनको आज के दिन की शुभकामनाएं और बधाई देने का काम करता हूं। आपको ये जो आज की घटना है उसके बारे में शायद आश्चर्य हो रहा होगा। कि खेलों के समर में जब एक तरह से मैंने दलगत राजनीति से पार्टी पॉलिटिक्स से अपने को अलग कर लिया था तो फिर मैं पार्टी में शामिल हो कर। क्यों एक्टिव हो रहा। तो मैं आपसे कहना चाहूंगा कि देश जो है वो एक बहुत अद्भुत परिस्थिति में है।

आज के दिन गुज़रता है बहुत अद्भुत परिस्थिति इसलिए है कि अभी तक जिन वैल्यूज को जिन मूल्यों को। हम बहुत महत्व देते थे। और ये सोच के चलते थे कि इस पर सब कोई अमल करेगा ही ,हमारे प्रजातंत्र में आज वो मूल्य खतरे में हैं और उनका अनुपालन नहीं हो रहा है । हम सब परिचित हैं इस बात से । ये सब खेल है प्रजातंत्र की ताकत का । प्रजातंत्र की संस्थाएं होती हैं देश था दिमाग से। नाइस इंवेस्टमेंट और इंस्टिट्यूशन सबने। आज लगभग हर। इंस्टीट्यूशन जो संस्था है प्रजातंत्र की वो कमजोर हो गई है। और मैं बहुत अफसोस के साथ इस बात को कह रहा हूं कि उसमें देश की जो न्यायपालिका है जुडिशरी वो भी शामिल है।

इसलिए सरकार के मनमानेपन के ऊपर अंकुश लगाने वाला कोई बचा ही नहीं है । तो हमारे देश के लिए यह सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

प्रजातंत्र का मतलब ये नहीं होता है कि सिर्फ आप हर पांच साल पर चुनाव करा दें लोगों को वोट देने का अवसर दें। प्रजातंत्र का मतलब होता है कि जो सरकार बनती है जो प्रतिनिधि चुने जाते हैं वो २४ घंटे सदन में जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करते रहे हैं।

पर आप देख रहे हैं कि हमारे देश में क्या हो रहा है और ऐसा लगता है जैसे कि किसी को कोई चिंता नहीं है। आज इस देश का किसान उद्वेलित है। जो किसान। पैदा करता है जो हम खाते हैं अन्नदाता है वह दिल्ली के सरहद पर बैठा हुआ है और किसी को कोई चिंता नहीं है ।

मजदूर पलायन करके रोजी रोटी की तलाश में गए। विभिन्न परिस्थिति में पैदल वापस सोने के लिए मजबूर हुए वो दृश्य हम सब लोगों ने देखा है। आज वो भी तरसते हैं । शिक्षा स्वास्थ। ये सब आज दुर्दिन से गुज़र रहे हैं और। सरकार को कोई चिंता नहीं है। ऐसा लगता है कि सरकार का आज के दिन और खासकर के जो। रूलिंग पार्टी है उसका एक ही मकसद है वो मकसद किसी तरह चुनाव जीतो जहां कहीं चुनाव हो जिस स्तर पर चुनाव हों उस चुनाव को जीतना जरूरी है।

आपके मन में ये प्रश्न आ रहा होगा कि मैं तो अटल जी की सरकार में मंत्री था तो मैंने उस पार्टी को क्यों छोड़ा। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अटल जी के समय की पार्टी और आज की पार्टी में आसमान जमीन का अंतर है । अटल जी रज़ामंदी में विश्वास करते थे ।

लेकिन आज की सरकार क्रश करने में विश्वास करती है । अटल जी लोक को प्राप्त करते थे। आज की सरकार लोगों को कम करना चाहती है उन पर जीत हासिल करना चाहती है । आप अटलजी के समय का देखें जो उन्होंने नैशनल कोएलिशन बनाया था तो जम्मू और कश्मीर में नेशनल कान्फ्रेंस फारूक अब्दुल्ला ,पंजाब में अकाली दल ,हरियाणा में चौटाला व उसके बाद आप आये महाराष्ट्र में शिवसेना। कर्नाटक में जनता दल एस ,तमिलनाडु में कभी अन्ना डीएमके या डीएमके, आंध्र प्रदेश में टीडीपी ,ओडिशा में बीजू जनता दल। बंगाल में ममता जी असम में असम गण परिषद बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी।
उन्होंने एकनाथ कनेक्शन सच माने में बनाया और यह कभी उनकी इच्छा नहीं रही कि इनको दबा दो। इनको बर्बाद कर दो और वो जो स्पेस खाली होता है उसको स्वयं के लिए ले लो। आज की जो भारतीय जनता पार्टी है। उसके साथ कौन है ।

अकाली दल छोड़ चुका, शिवसेना छोड़ चुके बाकी जितने नाम हमने लिए कोई भी आज साथ नहीं है। अकाली छोड़ गए जो सबसे पुराने सहयोगी थे। सब चले गए सिर्फ एक नीतीश कुमार के जेडी यू को छोड़कर बिहार में। उनके साथ कोई महत्वपूर्ण पार्टी आज के दिन नहीं। और इसलिए नहीं है क्‍योंकि उनके साथ वो रहने के काबिल नहीं हैं ,में इसलिए एक बहुत गंभीर लड़ाई आज जो देश में चल रही है वो गंभीर लड़ाई केवल चुनाव की लड़ाई नहीं है केवल राजनीत की लड़ाई नहीं है वो देश की स्मिता की रक्षा है ।

देश में जो प्रजातंत्र है उसकी रक्षा की लड़ाई में बदल चुकी है और मुझे लगता है कि जो लोग भी। इसमें विश्वास रखते हैं कि देश में प्रजातंत्र कायम रहना चाहिए। उनको इकट्ठे आने की जरूरत है। ममता जी और हमने साथ मिलकर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में काम किया था।

ममताजी शुरू से ही एक फाइटर रही हैं। आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब इंडियन एयरलाइंस का हवाई जहाज। उसको अगवा कर लिया गया था। अपहरण हो गया था और जो आतंकवादी थे उसको कंधार ले गए थे तो कैबिनेट में एक दिन चर्चा हो रही थी तो ममता जी ने ऑफर किया है कि वो स्वयं होस्टेज बन के जाएंगे वहां पर और शर्तें ये होनी चाहिए कि बाकी जो होस्टेज जैसे हैं उनको आतंकवादी छोड़ दें और वो उनके कब्जे में चली जाएंगी और जो कुर्बानी देनी पड़ेगी वो कुर्बानी देगी देश के लिए। तो आज ऐसी सारी ताकतों को इकट्ठे आने की जरूरत है ।

बंगाल में चुनाव होने जा रहा है। इसमें कोई शक नहीं है। कि तृणमूल कांग्रेस पूरी बहुमत से जीतेगी । बहुत ही मजबूती के साथ सत्ता में वापस आएगी। लेकिन मुझे लगता है कि हम सबका कर्तव्य बनता है कि उस बड़ी मेजॉरिटी को और हम भी बनाएं और बंगाल से एक संदेश जाये पूरे देश में। ये देश अब इसको बर्दाश्त नहीं करेगा। जो कुछ मोदी सर्कार कर रही है जनता के साथ।

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