दिल्ली पुलिस द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा के कार्यालय पर फिर से छापेमारी

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा के कार्यालय पर छापा मारा, जो दिल्ली में हुए मुस्लिम विरोधी दंगे में पीड़ित मुस्लिमों का केस लड़ रहे हैं। महमूद प्राचा ने दिल्ली पुलिस के इस छापे को “पूरी तरह से अवैध” बताया है ।

प्राचा ने कहा कि जब वह पुलिस द्वारा प्राप्त सर्च वारंट में दिए गए निर्देश के अनुसार उपस्थित नहीं हुए तो दिल्ली पुलिस के सैकड़ों अधिकारी आज उनके कार्यालय पहुंचे।

महमूद प्राचा ने मुख्य मेट्रोपोलिटन न्यायिक मजिस्ट्रेट पटियाला हाउस डॉक्टर पंकज शर्मा की अदालत में इस सम्बन्ध में तत्काल आवेदन भेजा है की उन्हें पहले से ही , सर्च वारंट जारी किया गया है । उक्त में संबंधित अधिकारी आईओ और डीसीपी स्पेशल सेल को नोटिस जारी किया गया है जिसमे महमूद प्राचा को कल सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है .
आवेदन में उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की उनके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को हटाने की मांग “पूरी तरह से अवैध और अन्यायपूर्ण” थी। अधिवक्ता ने कहा कि अधिकारियों ने जो दस्तावेज मांगे हैं, वे “पहले से से ही दिल्ली पुलिस के पास है .

अधिवक्ता ने यह भी बताया कि जांच अधिकारी ने अदालत से संपर्क किया, जैसा कि पिछली खोज में किया गया था, यहां तक ​​कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत उनसे कोई भी दस्तावेज मांगे बिना ही मेरे कार्यालय पर 24 दिसंबर 2020 को छापा मारा गया था,जो सरासर गलत है .
अल जज़ीरा से बात करते हुए, महमूद प्राचा ने आरोप लगाया था कि गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर छापा मारा गया था। दिल्ली और अन्य शहरों में भी दिसंबर में कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे।

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